RCB द्वारा रिटेन नहीं किए जाने पर छलका युजवेंद्र चहल का दर्द, कहा - टीम ने दूध में पड़ी मक्खी की तरह बाहर फेंक

Yuzvendra Chahal on Royal Challengers Bangalore: भारतीय लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल व्हाइट बॉल के दुनिया के सबसे अच्छे स्पिन गेंदबाजों में से एक हैं। दुनिया में शायद ही कोई ऐसी टीम होगी जो चहल को अपनी प्लेइंग 11 का हिस्सा नहीं बनाना चाहेगी। इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में चहल संजू सैमसन की कप्तानी वाली राजस्थान रॉयल्स (RR) के लिए खेलते हैं। रॉयल्स में आने से पहले चहल सालों तक रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (RCB) का हिस्सा रहे। लेकिन 2022 के मेगा ऑक्शन में उन्हें RCB ने रिटेन नहीं किया और राजस्थान रॉयल्स ने उन्हें 6.50 करोड़ की मोटी रकम कर्च कर खरीद लिया।

चहल जैसे वर्ल्ड क्लास स्पिनर को छोड़ना RCB को भारी पड़ा और टीम के पास अब कोई अच्छा स्पिन गेंदबाज नहीं है। सालों तक इस टीम का हिस्सा रहने वाले चहल ने पहली बार मीडिया के सामने रिटेन नहीं किए जाने को लेकर खुलकर बात की है। युजवेंद्र चहल ने यूट्यूबर रणवीर अलहाबादिया के पॉडकास्ट पर कहा कि उन्हें वास्तव में बहुत बुरा लगा था क्योंकि आठ साल तक फ्रेंचाइजी के लिए खेलने के बावजूद उन्हें रिटेन नहीं किया गया और प्रबंधन की ओर से कोई फोन नहीं आया और न ही कोई बात हुई।

चहल ने पॉडकास्ट में कहा, 'डेफिनेटली बहुत बुरा लगा, क्योंकि मेरा सफर 2014 से शुरू हुआ था। मैं 8 साल उस टीम से खेला। मुझे काफी कुछ वहां से मिला। उसी दौरान मैंने भारतीय टीम के लिए डेब्यू किया। जब मैं 2014 में RCB में आया था तब मुझे परफॉर्म करने के लिए चांस दिया। विराट भाई ने पहले मैच से भरोसा दिखाया। लेकिन थोड़ा सा बुरा लगता है जब आप टीम के लिए आठ साल खेलते हैं, क्योंकि एक फैमिली बन जाती है।'

लेग स्पिनर ने आगे कहा, 'फिर मैंने देखा कि तरह-तरह की बातें सामने आईं। अरे युजी ने बहुत पैसे मांग लिए होंगे। यह मांग लिया होगा वो मांग लिया होगा। बहुत सारी चीजें आई थीं। मैंने एक इंटरव्यू में क्लियर किया था कि कुछ पैसा नहीं मांगा। मैंने कुछ नहीं बोला कि मुझे इतना पैसा चाहिए। मुझे पता है कि मैं कितना डिजर्व करता हूं। मुझे इस बात का ज्यादा बुरा लगा कि कोई फोन कॉल नहीं आया। ना मुझे बताया गया। कम से कम बात तो करते। मैं उनके लिए करीब 114 मैच खेला। मुझे नहीं पता चला कि अचानक क्या हुआ।'

राजस्थान रॉयल्स की तारीफ करते हुए चहल ने कहा, 'रिटेन नहीं किए जाने के बाद मैं ऑक्शन में आया तो RCB ने प्रॉमिस किया था कि हम आपके लिए ऑल आउट जाएंगे। लेकिन ऐसा नहीं हुआ उन्होंने मेरे लिए बिड नहीं किया। मुझे गुस्सा आया, मैंने आठ साल किसी टीम को दिए। चिन्नास्वामी मेरा फेवरेट ग्राउंड है। मैंने RCB के कोच से बात भी नहीं की थी। जब राजस्थान रॉयल्स और RCB का मैच हुआ तो मैंने किसी से बात नहीं की। ऑक्शन ऐसी जीज है, जिसमें कुछ भी हो सकता है। आप कहीं भी जा सकते हैं। मुझे भी एहसाह हुआ कि जो भी होता है अच्छे के लिए होता है। राजस्थान रॉयल्स में आकर एक फायदा हुआ है कि मैं डेथ बॉलर बन गया। यहां आकर मेरी क्रिकेट की ग्रोथ 5-10 प्रतिशत बढ़ी।'



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