भारत बनाम पाकिस्तान... यूं लगा, जैसे पूरा भारत नरेंद्र मोदी स्टेडियम में समा गया हो

सौरभ कुमार गुप्ता. 1947 में जब ब्रिटिश हूकुमत के आदेश पर सर सिरिल रैडक्लिफ ने भारत और पाकिस्तान के बीच बंटवारे की लकीर खींची थी, तब उन्हें ये अंदाजा भी नहीं होगा कि आने वाले वक्त में वे दुनिया को दो देशों के बीच खेलों की सबसे बड़ी प्रतिद्धंद्धिता को भी जन्म देने वाले है। बंटवारे के बाद से ही भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच, पूरी दुनिया में दो देशों के बीच किसी खेल की सबसे बड़ी प्रतिद्धंद्धिता में से एक है। यही वजह है कि 14 अक्टूबर को जिस किसी ने अहमदाबाद के 1.30 लाख दर्शक क्षमता वाले नरेंद्र मोदी स्टेडियम में भारत और पाकिस्तान के बीच आइसीसी वनडे विश्व कप का मुकाबला देखा होगा, वो उसे जीवनभर नहीं भूला पाएगा।


किस्मत की बात यह रही कि मैं भी उस ऐतिहासिक मैच का हिस्सा बना और मुझे इस मैच को कवर करने का मौका मिला। अपने खेल पत्रकारिता करियर के 18 साल में मैंने कई मैच कवर किए हैं, लेकिन कभी एक जगह पर प्रशंसकों का इतना विशाल हुजूम एकसाथ नहीं देखा। मैच शुरू होने के बाद मैं काफी देर तक प्रेसबॉक्स से स्टेडियम में बैठे दर्शकों को निहार रहा था। टीम इंडिया की जर्सी पहने दर्शकों से खचाखच भरा हुआ नरेंद्र मोदी स्टेडियम नीले समंदर की तरह लग रहा था। टीम इंडिया ने भी दर्शकों को निराश नहीं किया और पाकिस्तान को करारी शिकस्त देकर उन्हें जीत का शानदार तोहफा दिया।

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इस मैच को देखने के लिए भारत के कोने-कोने से क्रिकेट प्रशंसक अहमदाबाद आए थे। इन प्रशसंकों में बच्चे, बुजुर्ग, युवा और महिलाएं भी शामिल थीं। ऐसा लग रहा था कि जैसे पूरा भारत नरेंद्र मोदी स्टेडियम में समा गया हो। इस मैच के लिए प्रशंसकों ने 2000 रुपए वाला टिकट 20,000 हजार रुपए तक में खरीदा। होटलों का किराया आसमान छू रहा था। आमतौर पर जिस होटल का प्रतिदिन का किराया दो से तीन हजार रुपए होता था, वो 10 से 15 हजार रुपए तक वसूल कर रहे थे। उस पर तेज गर्मी और उमस प्रशंसकों की परीक्षा ले रही थी। लेकिन इसके बावजूद प्रशसंकों के उत्साह में कोई कमी नहीं थी।

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मैं मैच शुरू होने से करीब चार घंटे पहले स्टेडियम के बाहर पहुंच गया था। मैं देखना चाहता था कि एक लाख से ज्यादा दर्शकों का हुजूम कैसा होता है, और जब प्रशंसक आने शुरू हुए तो यूं लगा जैसे ये कतार कभी खत्म ही नहीं होगी। सुरक्षा के कारण प्रशंसकों को स्टेडियम के प्रवेशद्वार तक पहुंचने के लिए कुछ किलोमीटर पैदल चलना पड़ा लेकिन इसके बावजूद भारत माता की जय और जीतेगा भई जितेगा, इंडिया जितेगा, जैसे नारों को बुलंद करते हुए प्रशंसकों के चेहरे पर थकान का नामोनिशान नहीं था।

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मैंने कई प्रशंसकों से पूछा कि आखिर इस मैच को लेकर उनमें इतना जुनून क्यों है, तो उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच मुकाबले से बड़ा कुछ नहीं हो सकता। इस मैच को देखने के लिए एक युवा दंपत्ति राजस्थान के सीकर से आया था। उन्होंने कहा कि 2016 के बाद पाकिस्तान टीम पहली बार भारत आई है और अब ना जाने दोबारा भारत आने में इस टीम को और कितने साल लग जाएं। ऐसे में वो इस ऐतिहासिक मैच का हिस्सा बनना चाहते थे, ताकि भविष्य में अपने बच्चों को इस मैच का अनुभव बता सके। सच्चाई ये है कि पाक टीम के अलावा किसी और से भारत का मैच होता तो स्टेडियम आधा भी मुश्किल से भरा होता।

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इस मैच के सफल आयोजन के लिए खासतौर पर बीसीसीआइ और गुजरात क्रिकेट संघ बधाई के पात्र हैं। किसी एक जगह पर एक लाख 30 हजार लोग एकत्र हों, तो वो नजारा कैसा होगा, एक पल के लिए आंख बंद करके सोचिए, जिस्म में सिरहन पैदा हो जाएगी। इस भारी भीड़ को संभालना किसी चुनौती से कम नहीं था। लेकिन पुलिस प्रशासन ने बिना किसी सख्ती से जिस शानदार तरीके से प्रशसंकों की भीड़ को संभाला, वो काबिलेतारीफ है, क्योंकि एक छोटी सी गलती यहां एक बड़े हादसे का कारण बन सकती थी।

विश्व कप का फाइनल भी अहमदाबाद में ही आयोजित होना है। प्रशंसकों की यही प्रार्थना है कि भारत और पाकिस्तान की टीम फाइनल में पहुंचे। यदि ऐसा हुआ तो नरेंद्र मोदी स्टेडियम में ऐसा ऐतिहासिक मैच खेला जाएगा, जिसकी मिसाल सालों तक दी जाएगी।



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