Sachin Tendulkar Birthday: सचिन ने बाउंसर फेंककर इस बल्‍लेबाज को किया था लहूलुहान, जानें उनसे जुड़े 10 रोचक किस्‍से

Happy Birthday Sachin Tendulkar : क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले मास्‍टर ब्‍लास्‍टर सचिन तेंदुलकर आज 24 अप्रैल को अपना 50वां जन्‍मदिन मना रहे हैं। सचिन तेंदुलकर ने जहां अपनी बल्‍लेबाजी के दम पर पूरी दुनिया को अपना कायल बनाया है। वहीं उनकी गेंदबाजी का भी कोई सानी नहीं था। पहले सचिन तेज गेंदबाज बनना चाहते थे, लेकिन डेनिस लिली ने उन्‍हें बल्लेबाजी पर फोकस करने के लिए कहा और उसके बाद जो हुआ उसे कौन नहीं जानता है। बता दें कि सचिन तेंदुलकर ने एक मैच के दौरान ऐसी बाउंसर फेंकी थी, जिससे बल्लेबाज की नाक टूट गई थी। यह वाक्‍या 20 अप्रैल 1991 को दिल्ली और मुंबई के बीच रणजी मैच के दौरान हुआ था। आज उनके जन्‍मदिन पर हम आपको उनके ऐसे ही 10 रोचक किस्‍सों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोगों को पता है।

1. सचिन ने बाउंसर से तोड़ी थी बंटू सिंह की नाक

बंटू सिंह ने 20 अप्रैल 1991 की घटना को याद करते हुए बताया कि वह मुंबई के खिलाफ रणजी मैच में बल्‍लेबाजी कर रहे थे। इसी बीच सचिन तेंदुलकर ने एक ऐसा बाउंसर फेंका कि मेरी नाक का नक्‍शा बदल गया और खून बहने लगा। चोट इतनी गंभीर थी कि वह संतुलन खो बैठे। मांजरेकर स्लिप से दौड़कर आए और मुझे संभाला। इसके बाद मुझे अस्पताल ले जाया गया। जहां पता चला कि नाक में कई फ्रैक्चर हैं और सर्जरी करानी होगी। इसके बाद रात को सचिन ने फोन कर मेरा हाल पूछा।

2. जब बालकनी में फंस गया था सचिन का सिर

सचिन तेंदुलकर ने अपनी किताब में खुद ये खुलासा किया था कि जब वह छोटे थे, तब बहुत जिद्दी थे। एक बार वह पिता से साइकिल खरीदने की जिद कर बैठे। पिता आर्थिक स्थि‍ति ठीक नहीं होने के चलते उनकी जिद पूरी नहीं कर पा रहे थे। इसलिए वह एक दिन बालकनी में चले गए और नीचे की ओर झांकने लगे। इसी बीच उनका सिर ग्रिल में फंस गया। यह देख माता-पिता दौड़कर उनके पास पहुंचे। मां ने सिर में बहुत सारा तेल लगाकर जैसे-तैसे सिर बालकनी की ग्रिल से निकाला। इसके बाद पिता ने लोगों से पैसा उधार लेकर मेरी जिद पूरी की।

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3. पिता के निधन के बाद मैदान में उतर जड़ा शतक

सचिन तेंदुलकर के पिता रमेश तेंदुलकर प्रोफेसर थे। पिता प्रोफेसर रमेश तेंदुलकर का 1999 में निधन हो गया था और उस दौरान वर्ल्‍ड कप भी चल रहा था। इसके चलते सचिन ने घर पर केवल चार दिन ही बिताए और फिर सीधे टीम से जुड़ गए। इसके बाद सचिन तेंदुलकर ने ब्रिस्‍टल में केन्‍या के खिलाफ नाबाद 140 रन की शानदार पारी खेली। सचिन ने अपनी इस पारी को अपने पिता को समर्पित किया था।

4. पाकिस्‍तानी गेंदबाज को सचिन पर तंज कसना पड़ा भारी

सचिन तेंदुलकर को उनके शांत स्‍वभाव के लिए भी जाना जाता है, लेकिन क्‍या आप जानते हैं कि उन्‍हें गुस्‍सा भी आता है। एक बार की बात है कि पाकिस्‍तान के गेंदबाज कादिर ने सचिन पर तंज कसते हुए कहा था कि किसी बच्‍चे गेंदबाज की धुनाई क्‍यों करते हो। हमे मारकर दिखाओ तो जानें। इस पर सचिन ने कादिर को बल्‍ले से ऐसा जवाब दिया, जो शायद ही कभी भूल पाएं। सचिन ने कादिर के एक ओवर में 28 रन कूटे थे।

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5. जब विराट कोहली ने सचिन को गिफ्ट की अपनी चेन

सचिन तेंदुलकर को ऐसे ही क्रिकेट का भगवान नहीं कहा जाता है। आम से लेकर हर खास आज भी उनका कायल है। ये वाक्‍या तब का है, जब सचिन तेंदुलकर ने संन्‍यास लिया था। उस दौरान विराट कोहली ने अपनी चेन सचिन को गिफ्ट की थी, जिसमें उनके पिता की यादें बसी थीं। इसके बाद विराट ने वानखेड़े स्‍टेडियम के ड्रेसिंग रूम में सचिन के लिए तुझ में रब दिखता है... गाना भी गाया था।

6. जब डॉन ब्रैडमैन ने कहा, ये तो मेरी तरह बल्‍लेबाजी करता है

ऑस्ट्रेलिया के पूर्व दिग्गज डॉन ब्रैडमैन को सबसे महान बल्लेबाज माना जाता है। डॉन ब्रैडमैन ने जब पहली बार सचिन तेंदुलकर की बल्लेबाजी देखी तो उन्‍होंने कहा था कि ये लड़का तो मेरी तरह बल्‍लेबाजी करता है। बता दें कि सचिन ही दुनिया के ऐसे इकलौते बल्लेबाज हैं, जिनको लेकर डॉन ब्रैडमैन ने ये बात कही थी। बताया जाता है कि इसके बाद ब्रैडमैन ने अपने जन्‍मदिन पर सचिन तेंदुलकर को भी बुलाया था।

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7. कमरे में कभी खाली नहीं बैठते थे सचिन

भारत के पूर्व कोच अंशुमन गायकवाड़ ने बताया कि सचिन अपने दौरों पर अन्‍य की तरह कमरे में बैठे नहीं रहते थे। वह टेबल टेनिस या अन्‍य कोई खेल खेलते रहते थे। उन्‍हें जीतना पसंद था। वह कमरे में अकेले हमेशा संगीत सुनते थे और अपने कपड़ों पर इस्त्री भी खुद किया करते थे। वह ऐसे खिलाड़ी थे, जिन्‍हें हर कोई अपनी टीम में लेना चाहता था।

8. ओलंगा को घूरकर देखना पड़ा भारी

1998 में चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान भारतीय टीम 209 रनों के लक्ष्य का पीछा कर रही थी। इस मैच में जिम्बाब्वे के हेनरी ओलंगा गांगुली और द्रविड़ को आउट करने के बाद सचिन को आउट किया, लेकिन अंपायर ने नो बॉल दे दी। हालांकि सचिन ओलंगा की अगली ही गेंद पर आउट हो गए। सचिन का विकेट लेते ही ओलंगा ने घूरकर देख लिया। इसके 36 घंटे बाद भारत और जिम्बाब्वे के बीच फाइनल खेला गया। जिम्बाब्वे ने 196 रन बनाए। इसके बाद सचिन जिम्बाब्वे के साथ ओलंगा पर भी कहर बनकर टूटे। सचिन ने 92 गेंद पर नाबाद 124 रन बनाए।

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9. फिर कभी सचिन का विकेट नहीं ले सके ब्रैड हॉग

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच वनडे सीरीज का तीसरा मैच 5 अक्टूबर 2007 को हैदराबाद में खेला जा रहा था। ऑस्ट्रेलिया ने 290 रन बनाए। इस मैच में सचिन ब्रैड हॉग गेंद पर क्लीन बोल्ड हो गए और भारत 47 रन से हार गया। अगले दिन ब्रैड हॉग ने विकेट वाले फोटो पर सचिन से ऑटोग्राफ मांगा। इस पर सचिन ने लिखा- बधाई, लेकिन ऐसा दोबारा कभी नहीं होगा। उस दिन के बाद ब्रैड हॉग सचिन का विकेट कभी नहीं ले पाए।

10. सचिन आउट होते ही बंद हो जाते थे टीवी

90 के दशक में जैसे ही सचिन तेंदुलकर आउट हो जाते थे, तो खेल समाप्‍त माना जाता था। सचिन की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगा सकते हैं कि शुरुआती सालों तक सचिन तेंदुलकर के आउट होते घरों में टीवी भी बंद हो जाया करते थे। क्‍योंकि जब तक सचिन क्रीज पर होते थे, तब तक ही फैंस को जीत की उम्‍मीद रहती थी।

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