नई दिल्ली। टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने टेस्ट क्रिकेट से तो वर्ष 2014 में ही संन्यास ले लिया था, लेकिन इंटरनेशनल वनडे क्रिकेट से संन्यास लेने के लिए उन्होंने पिछले साल 15 अगस्त (Independence Day) का दिन चुना था। साथ ही धोनी के जिगरी दोस्त माने जाने वाले क्रिकेटर सुरेश रैना ने भी कुछ मिनटों बाद इसी दिन संन्यास की घोषणा की थी। धोनी ने अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच जुलाई, 2019 में न्यूजीलैंड के खिलाफ वर्ल्ड कप में खेला था। हालांकि सेमीफानइल में भारत मुकाबला हार गया था।
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इस पारी ने बदली धोनी की किस्मत
जब महेंद्र सिंह धोनी पाकिस्तान के खिलाफ 2005 की वनडे सीरीज के दूसरे मैच में उतरे तो उन पर काफी दवाब था। क्योंकि वह 2004 में बांग्लादेश सीरीज में नाकाम रहे थे। हालांकि इसके बावजूद उन्होंने 123 गेंद पर 148 रनों की पारी खेली। इस पारी ने धोनी की किस्मत ही बदल दी और इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
ऐसे शुरू हुआ कप्तानी का सफर
साल 2004 से 2007 तक धोनी के क्रिकेट कॅरियर में कई उतार—चढ़ाव आए। साल 2007 में जब सौरभ गांगुली, राहुल द्रविड़ और सचिन तेंदुलकर जैसे खिलाड़ियों ने खुद को इससे अलग रखने का फैसला किया तो धोनी को टीम की कमान सौंपी गई। इसके बाद उनकी कप्तानी में एक युवा टीम ने पहला टी20 वर्ल्ड कप जीता।
टेस्ट में नंबर वन
धोनी ने टी20 वर्ल्ड कप जिवाने के बाद भारतीय टीम को टेस्ट रैंंकिंग में नंबर वन पर पहुंचाया। घरेलू सीरीज में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 213 रन की पारी खेली और भारत ने ऑस्ट्रेलिया को सीरीज में 4-0 से मात दी। सचिन तेंडुलकर ने उनकी कप्तानी में खेले एक टेस्ट मैच के बाद कहा था कि ड्रेसिंग रूम का माहौल इससे बेहतर कभी नहीं रहा।
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आईपीएल में कमाल
महेंद्र सिंह ने आईपीएल टीम चेन्नई सुपर किंग्स को अपनी कप्तानी में 3 बार चैंपियन बना चुके हैं। वह 2008 से चेन्नई सुपर किंग्स के साथ हैं। बीच में दो साल वह राइजिंग पुणे सुपर जायंट्स की और से खेले थे।
वनडे वर्ल्ड कप और चैंपियंस ट्रॉफी
धोनी की कप्तानी में भारत ने साल 2011 में आईसीसी वर्ल्ड कप जीता। 28 साल बाद भारतीय टीम ने वर्ल्ड कप जीता। विनिंग शॉट भी उनके ही बल्ले से निकला। इसके बाद उन्होंने साल 2013 में चैंपियंस ट्रॉफी पर भी कब्जा किया। वह पहले कप्तान बने जिन्होंने तीनों आईसीसी ट्रॉफी जीतीं।
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